Skip to main content

मीराई - फिल्म (Mirai - Super Yodha)

फिल्म रिव्यू: मिराई (Mirai - Super Yodha)


​तेलुगु अभिनेता तेजा सज्जा की फिल्म 'हनु-मान' की शानदार सफलता के बाद, उनकी अगली फिल्म 'मिराई' 12 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई। यह एक फैंटेसी-एक्शन एडवेंचर फिल्म है, जो प्राचीन भारतीय इतिहास और भविष्य की तकनीक का एक अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करती है।



कहानी (Plot)

​फिल्म की कहानी अशोक के नौ रहस्मयी रत्नों (Nine Unknown Men) की प्राचीन कथा पर आधारित है। कहानी वेदा (तेजा सज्जा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक साधारण युवक है और अपनी रोजी-रोटी के लिए छोटे-मोटे काम करता है। उसकी जिंदगी तब बदल जाती है जब उसे पता चलता है कि वह एक 'सुपर योद्धा' है और उसका भाग्य प्राचीन ग्रंथों की रक्षा करने से जुड़ा है।


​एक दुष्ट शक्ति, जिसे 'ब्लैक स्वॉर्ड' (The Black Sword) कहा जाता है और जिसका नेतृत्व महावीर लामा (मंचू मनोज) कर रहा है, इन नौ पवित्र ग्रंथों को हासिल करना चाहता है ताकि वह दुनिया पर राज कर सके। वेदा को इन ग्रंथों को बचाने और दुनिया को अंधकार से बचाने के लिए अपनी शक्तियों को अपनाना पड़ता है। इस सफर में एक संन्यासिनी विभा (रितिका नायक) उसकी मदद करती है।

अभिनय (Performances)

  • तेजा सज्जा (वेदा): 'हनु-मान' के बाद तेजा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह इस तरह के किरदारों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। उन्होंने एक साधारण लड़के से सुपर योद्धा बनने तक के सफर को बहुत ही सहजता और आत्मविश्वास के साथ निभाया है। एक्शन दृश्यों में उनकी ऊर्जा देखने लायक है।
  • मंचू मनोज (महावीर लामा): एक लंबे समय बाद वापसी कर रहे मंचू मनोज ने विलेन के किरदार में जान डाल दी है। उनका लुक और दमदार अभिनय दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ता है। वह तेजा सज्जा को कड़ी टक्कर देते नजर आते हैं।
  • अन्य कलाकार: रितिका नायक, श्रिया सरन, जगपति बाबू और जयराम ने भी अपनी-अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष (Direction and Technical Aspects)

​फिल्म का निर्देशन कार्तिक गट्टमनेनी ने किया है। उन्होंने पौराणिक कथाओं को आधुनिक एक्शन और विजुअल इफेक्ट्स (VFX) के साथ खूबसूरती से जोड़ा है।

  • VFX और एक्शन: फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स बहुत प्रभावशाली हैं। कम बजट में भी हॉलीवुड फिल्मों जैसा अनुभव देने की कोशिश की गई है। एक्शन सीक्वेंस, विशेष रूप से इंटरवल और क्लाइमेक्स के दृश्य, दर्शकों को रोमांचित कर देते हैं।
  • संगीत: गौरा हरि का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के माहौल को और भी गंभीर और रोमांचक बनाता है।

क्या अच्छा है?

  • ​एक नई और अनोखी कहानी जो भारतीय पौराणिक कथाओं से प्रेरित है।
  • ​तेजा सज्जा और मंचू मनोज का दमदार अभिनय।
  • ​शानदार विजुअल इफेक्ट्स और एक्शन सीन।
  • ​फिल्म का तेज स्क्रीनप्ले जो दर्शकों को बांधे रखता है।

क्या बेहतर हो सकता था?

  • ​कुछ समीक्षकों के अनुसार, फिल्म की कहानी पहले हाफ में थोड़ी धीमी और अनुमानित लगती है।
  • ​फिल्म के भावनात्मक पहलू को और मजबूत किया जा सकता था।



​अभिनेता तेजा सज्जा

​तेजा सज्जा आज तेलुगु सिनेमा के सबसे प्रतिभाशाली युवा अभिनेताओं में से एक हैं। 'मिराई' और 'हनु-मान' जैसी फिल्मों ने उन्हें पूरे भारत में पहचान दिलाई है।

  • प्रारंभिक जीवन और करियर: तेजा का जन्म 23 अगस्त 1995 को हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने बहुत छोटी उम्र में ही अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया था। उन्होंने 1998 में मेगास्टार चिरंजीवी की फिल्म 'चूडालानी वुंडी' से एक बाल कलाकार के रूप में अपनी शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने 'इंद्रा', 'युवराजु', 'छत्रपति' और 'कलिसुंदम रा' जैसी 20 से अधिक सफल फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम किया।
  • मुख्य अभिनेता के रूप में सफर: बड़े होने के बाद, तेजा ने मुख्य अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनकी पहली मुख्य भूमिका वाली फिल्म 'ज़ॉम्बी रेड्डी' (2021) थी, जो एक हिट साबित हुई। लेकिन उन्हें असली स्टारडम 2024 में आई फिल्म 'हनु-मान' से मिली। इस फिल्म की जबरदस्त सफलता ने उन्हें पैन-इंडिया स्टार बना दिया।
  • फिल्मों का चयन: तेजा सज्जा को ऐसी स्क्रिप्ट चुनने के लिए जाना जाता है जो अलग और दिलचस्प होती हैं। वह कमर्शियल फिल्मों के साथ-साथ कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा में भी संतुलन बनाए रखते हैं, जैसा कि उनकी 'हनु-मान' और 'मिराई' जैसी फिल्मों से साफ है।
  • प्रमुख फिल्में:
    • ​चूडालानी वुंडी (1998) - बाल कलाकार
    • ​इंद्रा (2002) - बाल कलाकार
    • ​छत्रपति (2005) - बाल कलाकार
    • ​ओह! बेबी (2019) - सहायक भूमिका
    • ​ज़ॉम्बी रेड्डी (2021) - मुख्य अभिनेता
    • ​हनु-मान (2024) - मुख्य अभिनेता
    • ​मिराई (2025) - मुख्य अभिनेता

​तेजा सज्जा अपनी मेहनत और सही फिल्मों के चयन से तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं।


निष्कर्ष:

​कुल मिलाकर, 'मिराई' एक देखने लायक एक्शन-फैंटेसी फिल्म है। यह उन दर्शकों को बहुत पसंद आएगी जिन्हें पौराणिक कथाओं और सुपरहीरो फिल्मों का मिश्रण अच्छा लगता है। दमदार प्रदर्शन, शानदार विजुअल्स और एक मनोरंजक कहानी के साथ, यह फिल्म एक बेहतरीन सिनेमा का अनुभव देती है।


Comments

Popular Posts

“माणुसकी – मनाला स्पर्श करणारी कथा”

माणुसकी ➖➖➖➖➖➖➖➖➖ रात्रीचे नऊ वाजलेले पाहून जफरभाईंनी आपल्या पोराला, आसिफला, हाक दिली… “ओ आसिफ… चल गाडीयां अंदर लगा.” आसिफ मित्रासोबत गप्पा मारत होता. मित्राला _ “चल उद्या सकाळी कॉलेजात भेटू” _ म्हणत त्यानं कटवलं व दुरुस्तीला आलेल्या गाड्या आत दुकानात एका बाजूला एक लावू लागला. बारा बाय दहाच्या दुकानात पाच सहा गाड्या बसवायची कसरत रोज करायला लागायची. पण गिर्‍हाइकाच्या  गाड्या बाहेर ठेवून चालणार नाही, हे त्यालाही ठाऊक होतं. त्यात बारीक पाऊस चालू झाला होता. गाड्या लावून होईपर्यंत जफरभाईंनी सगळं सामान आत ठेऊन दिलं. हात धुतले व पोराकडे पाहिलं… त्यांना बरं वाटलं. _ ‘आपण नशीबवान… पोरगं कॉलेज शिकतंय आणि धंद्यात पण आपल्याला मदत करतंय. नाहीतर आपल्या भावांची पोरं… सगळीजण गॅरेजच्या कामात… पण दहावीच्या पुढे एकपण शिकला नाही.’ _ पाऊस आता वाढला होता. अजून वाढण्याआधी घरी पोहोचणं आवश्यक होतं. दुकानाचं शटर ओढून कुलूप लावून जफरभाई वळणार, तोच एक तरुण जोडपं गाडी ढकलत त्यांच्या दरवाज्याशी आलं. बाइकवर आधीच जाऊन बसलेला आसिफ लगेचच म्हणाला, _ “दुकान बंद हुआ भाई…!” _ जफरभाईंनी आसिफकडे फक्त एक कटाक्ष...

अजेय : योगी आदित्यनाथ के जीवन की अनकही कहानी

"अजेय" 19 सितंबर 2025 को रिलीज़ हुई फिल्म 'अजेय: एन अनटोल्ड स्टोरी ऑफ योगी' का सरल हिंदी भाषा में रिव्यू पढ़ें। जानें कैसी है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह बायोपिक, इसकी कहानी, कलाकारों का अभिनय और क्या आपको यह फिल्म देखनी चाहिए??? "अजेय: एन अनटोल्ड स्टोरी ऑफ योगी": योगी आदित्यनाथ के जीवन की अनकही कहानी ​ मुंबई: हाल ही में 19 सितंबर 2025 को रिलीज़ हुई फिल्म "अजेय: एन अनटोल्ड स्टोरी ऑफ योगी" उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित एक बायोपिक है। यह फिल्म उनके प्रारंभिक जीवन से लेकर एक प्रभावशाली राजनेता बनने तक के सफर को दर्शाती है। फिल्म का निर्देशन रवींद्र गौतम ने किया है और इसमें मुख्य भूमिका में अनंत जोशी ने योगी आदित्यनाथ का किरदार निभाया है। ​यह फिल्म शांतनु गुप्ता की किताब "द मॉन्क हू बिकेम चीफ मिनिस्टर" से प्रेरित है। फिल्म अजय सिंह बिष्ट के साधारण लड़के से योगी आदित्यनाथ बनने की कहानी को पर्दे पर लाती है, जो उत्तराखंड के एक छोटे से गाँव से निकलकर भारत के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री पद तक पहुँचते है। ...

दादी माँ ने बताया "भूख बढ़ाने" का नुस्खा।

दादी माँ ने बताया "भूख बढ़ाने" का  नुस्खा। हमारे शरीर की अग्नि खाए गए भोजन को पचाने का काम करती है। यदि यह अग्नि किसी कारण से मंद पड़ जाए तो भोजन ठीक तरह से नही पचता है। भोजन के ठीक से नही पचने के कारण शरीर में कितने ही रोग पैदा हो जाते है। अनियमित खान पान से वायु पित्त और कफ़ दूषित हो जाते है।।जिसकी वजह से भूख लगनी बंद हो जाती है और अजीर्ण अपच वायु विकार तथा पित्त आदि की शिकायतें आने लगती है। Dadi maa ke asardar nuskhe jo bhukh badhate hai, swasthya sudharte hai aur pachan shakti majboot karte hai भूख लगनी बंद हो जाती है, शरीर टूटने लगता है, स्वाद बिगड जाता है। पेट में भारीपन महसूस होने लगता है। पेट खराब होने से दिमाग खराब रहना चालू हो जाता है अथवा समझ लीजिये कि शरीर का पूरा का पूरातंत्र ही खराब हो जाता है। इसके लिये मंन्दाग्नि से हमेशा बचना चाहिए और तकलीफ़ होने पर इन दवाओं का प्रयोग करना चाहिए। भूख नही लगने पर आधा माशा फूला हुआ सुहागा एक कप गुनगुने पानी में दो तीन बार लेने से भूख खुल जाती है। काला नमक चाटने से गैस खारिज होती है, और भूख बढती है। यह नमक पेट को भी साफ़ करता है...

विसर्जन

"विसर्जन'' ➖➖➖➖➖ पहाटेचे पाच वाजले तसें काशिनाथ रावांना जाग आली, ही त्यांची रोजचीच वेळ, आत उठून काय करायचे हा त्याच्या पुढे प्रश्न. बेडरूम मध्ये मुलगा प्रमोद आणि सून प्रणिता नातू आदर्श झोपलेले. काशिनाथराव आणि त्यांची पत्नी हॉलमध्ये, त्यांच्या पत्नीला गुढगे दुखी त्यामुळे ती वर कोचवर आणि खाली चटईवर काशिनाथराव. काशिनाथराव चुळबुळ करत पडून राहिले, त्याना माहित होत, यावेळी आपण उठलो तर सर्वांच्या तोफखण्याला तोंड द्यावे लागेल, त्यापेक्षा गुपचूप पडून राहावे. चहा चा वास आला की हळूच उठावे, कोणी चहा दिला तर गुपचूप घ्यावा. आपली परिस्थितीच तशी आली आहे किंवा घरातील इतरांनी आपली परिस्थिती घरातील झाडू सारखी केली आहे. काशिनाथ रावांनी निश्वास टाकला. पैसे न कमावणाऱ्या म्हाताऱ्या माणसाची परिस्थिती ही अशीच. काशिनाथरावांची पत्नी उठली आणि तिने चहा ठेवला हे त्यांनी ऐकले आणि ते हळूच उठले आणि बाथरूममध्ये गेले, चहा झाल्यावर ती मुलाला आणि सुनेला हाक मारायला त्याच्या बेडरूम जवळ गेली आणि दारावर थापा मारू लागली, हे त्यांनी ऐकले. त्याना वाटले ती आता आपल्याला चहा देईल, या आशेवर ते कोचवर बसून राहिले. तेप...

दादी माँ ने बताया "बुखार" का आयुर्वेदिक इलाज

दादी माँ ने बताया "बुखार" का आयुर्वेदिक इलाज   "बुखार" बदलते मौसम में बुखार की चपेट में आना एक आम बात है। कभी वायरल फीवर के नाम पर तो कभी मलेरिया जैसे नामों से यह सभी को अपनी चपेट में ले लेता है। "Fever ka ayurvedic ilaj janiye. Dadi maa ke nuskhe se bukhar kam karne ke herbal aur natural remedies in Hindi." #Ayurveda #HomeRemedies #FeverCure #NaturalTreatment #DadiMaaKeNuskhe #HerbalMedicine #HealthTips फिर बड़ा आदमी हो या कोई बच्चा इस बीमारी की चपेट में आकर कई परेशानियों से घिर जाते हैं। कई बुखार तो ऐसे हैं जो बहुत दिनों तक आदमी को अपनी चपेट में रखकर उसे पूरी तरह से कमजोर बना देता है। पर घबराइए नहीं सभी तरह के बुखार की एक अचूक दवा है भुना नमक। इसके प्रयोग किसी भी तरह के बुखार को उतार देता है। भुना नमक बनाने की विधि खाने मे इस्तेमाल आने वाला सादा नमक लेकर उसे तवे पर डालकर धीमी आंच पर सेकें। जब इसका कलर कॉफी जैसा काला भूरा हो जाए तो उतार कर ठण्डा करें। ठण्डा हो जाने पर एक शीशी में भरकर रखें। जब आपको ये महसूस होने लगे की आपको बुखार आ सकता है तो बुखार आने से...

निर्णय

 ⚙️ 🈸 निर्णय ➖➖➖➖➖ काल साडेपाच चा गजर झाला आणि रोजच्या प्रमाणं तो दहा मिनिटं Snooze करून मी पांघरूण ओढून घेतलं.  पाच चाळीस ला परत एकदा फोनची केकावली ऐकली आणि आळोखे पिळोखे देत उठले कशीबशी अंथरुणातून.  नवरा गाढ झोपेत होता. मनात म्हटलं, किती नशीबवान प्राणी आहे यार! छान सात वाजता उठेल आणि स्वतःचं आवरून, डबा घेऊन पळेल ऑफिसला. इकडची काडी तिकडे नको करायला.  पूर्वी कौतुक वाटायचं त्याच्या या वागण्याचं… पण हल्ली संताप येतो आणि तिळपापड होतो माझा नुसता. चरफड होते, पण काय करणार? मीच सोकावून ठेवलंय सगळ्यांना.  तोंडावर पाण्याचे हबके मारले आणि आणि केसाचा बुचडा बांधला पटकन. हात चटचट चालवायला हवे होते. वेळेत निघाले तरच महिला विशेष गाडी मिळते. थोडं टेकायला मिळतं बूड, चौथ्या सीटवर तरी. प्रातर्विधी उरकले पटापट, भसाभसा दात घासले यंत्रवत, आधण ठेवलं चहासाठी आणि कणकेचा डबा उघडला. सकाळी उठून कणिक भिजवायची म्हणजे चिडचिड नुसती! एकीकडे, कालच घरी येताना आणलेली, निवडलेली, फरसबी धुवून घेतली.  चहा घेऊन जरा बरं वाटलं. तात्पुरता दिलासा, थकलेल्या शरीराला आणि मनाला.  उसासा टाकून उठले, घड...

निरपेक्ष

'निरपेक्ष' ➖➖➖➖➖ त्याचं ड्रिंक संपवून तो बिल मागवणारच होता,  इतक्यात  'ती' मुलगी त्याच्या टेबल जवळ आली. ब-याच वेळेपासून ती त्याच्यावर नजर लावून बसली होती. एकवीस-बावीस वर्षे वय असावं तिचं फार तर फार. त्याने तोवर तिच्याकडे फारसे लक्षही दिले नव्हते. शेवटी धाडस करुन ती त्याच्यासमोर येउन उभी राहिली. 'सो..हँडसम..शनिवारची रात्र आहे..हाउ अबौट सम फन?' त्याने तिच्याकडे पाहिलं... त्याला प्रेटी वूमन मधल्या ज्युलीया राॕबर्टसची उगीचच आठवण झाली. म्हणजे रिचर्ड गिअर... स्वतःच्या मनात आलेल्या विचारांना तो हसला व तिला म्हणाला 'सॉरी मिस..नाॕट इंटरेस्टेड' ती थोडीशी नाराज झाली.. पण मग एका वेगळ्याच निर्धाराने त्याच्यासमोरच्या खुर्चीवर बसली. शांतपणे एक सिगारेट शिलगावत त्याला म्हणाली 'कमीटेड आहेस? मी पहातेय तु एकटाच आहेस..असतोस. नेहमी विकेंड्सना बघते इथे तुला..एकटाच येतोस..बिअर पितोस..जातोस..कधी कोणी मुलगी बरोबर नसते.' सिगरेटचा एक झुरका घेत ती हळू आवाजात मिश्कीलपणे म्हणाली  'प्लीज 'गे' आहेस असं सांगू नको मला आता..' तो परत हसला. तिने सोडलेल्या ...