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सरप्राईज

सरप्राईज देण्यासाठी गेली पण... ➖➖➖➖➖ आज पहील्यांदा अचानक गावी जावून आईबाबांना आश्चर्यचकीत करणार होते. मला त्यांच्या डोळ्यातून ओसंडणारा आनंद पाहायचा होता. तब्बल चार महीन्यानी मी गावी जात होते. 'माझ्या असानमेंट पूर्ण करायच्या आहेत त्यामुळे मला गावी यायला नाही जमत आहे' असे अण्णांना सांगून मी मोबाईल बंद केला आणि मी माझी बॅग भरायला घेतली. हॉस्टेलमध्ये माझ्यासोबत आमच्याच गावातील सरीता असल्यामुळे मला कधीच आई बाबांना आश्चर्यचकीत करता आले नव्हते. पण कालच सरीता तिच्या मामाच्या गावी गेली होती. त्यामुळे हा प्लान मला आखता आला होता. माझ्या मोबाईलवर सरीताचा कॉल आला तेव्हा नाखुशीनेच मी तो उचलला. "हॅलो, बोल गं" "मी पोचले, तुझा काय प्लान आहे, शनिवार रविवारचा?" असे सरीताने विचारल्यावर मी सावध पवित्रा घेतला. "मी नानेघाटच्या ट्रेकला जातेय, नाईट स्टे आहे" मी ट्रेकला जाते म्हटल्याबरोबर तिने तिचे बोलणे आवरते घेतले. "ठीक आहे, बरं झालं मी मामाकडे निघून आले ते. मस्त आराम करायचा सोडून कसले ते डोंगर चढता कोणास ठाऊक?" असे बोलून तिने कॉल कट केला. पिच्छा सुटला...

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) बदलती दुनिया की नई क्रांति आज हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं, जहाँ विज्ञान और तकनीक हमारी कल्पना से कहीं आगे निकल चुकी है। इंसान ने आग, पहिए और बिजली की खोज से लेकर इंटरनेट तक का सफर तय किया, लेकिन अब वह एक ऐसी दिशा में बढ़ रहा है जिसे हम कहते हैं – कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एक नई तकनीकी क्रांति है जो हमारे जीवन, काम और भविष्य की दिशा को तेजी से बदल रही है। इससे लोगों के जीने की पद्धति बदल रही है। जीने की रफ्तार तेज हो रही है। सब कुछ चुटकी बजाने इतना आसान होते जा रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्या है? कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अर्थ है – मशीनों को इतना सक्षम बनाना कि वे इंसानों की तरह सोचें, निर्णय लें और समस्याओं का हल निकालें। सीधे शब्दों में कहें तो यह “मशीनों में इंसानी दिमाग की ताक़त डालने की कला” है। जब गूगल मैप्स आपको सबसे तेज़ रास्ता दिखाता है, जब नेटफ्लिक्स या यूट्यूब आपके पसंदीदा वीडियो सुझाते हैं, या जब एलेक्सा और सिरी आपकी आवाज़ पहचानकर जवाब देती हैं – तो समझ लीजिए कि यह सब कृत्रिम बुद्धिमत्ता का ही कमाल है।...

मराठी माणूस “मागे” का???

मराठी माणूस “मागे” का??? मराठी माणूस “मागे” असण्याची २३ कारणे… आर्थिक सल्लागार मकरंद गाडगीळ यांच्या लेखणीतून… १) कमी प्रवास प्रवास केल्याने जग कळते, कल्पना सुचतात, मार्ग सापडतात व प्रगती होते. मराठी माणूस आर्थिक स्थितीमुळे फारसा प्रवास करताना दिसत नाही, अनेक औद्योगिक प्रदर्शनात मराठी माणूस दिसत नाही. २) अति राजकारण सर्वतजास्त मराठी माणूस राजकारण वेडा आहे. राजकीय नेत्यांच्या सभेला आपला कामधंदा सोडून लाखोंच्या संख्येने येणारा मराठी माणूसच असतो. यात व्यापारी समाजातला एक तरी माणूस दिसतो का? मी काय करतो आहे या पेक्षा लोकांनी काय केले, काय करतात यात जास्त लक्ष. ३) दोनच हात कमावणारे सर्वसाधारण मराठी कुटुंबात एकच व्यक्ती कमवते. कुटुंबातील जास्तीत जास्त लोकांनी काम केले पाहिजे. ४) सर्वांची तोंडे वेगळ्या दिशेला कुटुंबात एकी नसते. बाप एका दिशेला, मोठा मुलगा एका दिशेला तर लहान भाऊ तिसरीकडेच. प्रत्येक कुटूंबात एकी पाहिजे. ५)  खोटं बोल पण रेटून बोल सगळ्या थापा एकमेकांना गंडवण्याच्या गोष्टी, खरे सांगण्यासारखे नसतेच म्हणून खोट बोलावे लागते. मी हे करीन ते करीन या स्वप्नातच आयुष्य संपते, पण मी हे कर...

“माणुसकी – मनाला स्पर्श करणारी कथा”

माणुसकी ➖➖➖➖➖➖➖➖➖ रात्रीचे नऊ वाजलेले पाहून जफरभाईंनी आपल्या पोराला, आसिफला, हाक दिली… “ओ आसिफ… चल गाडीयां अंदर लगा.” आसिफ मित्रासोबत गप्पा मारत होता. मित्राला _ “चल उद्या सकाळी कॉलेजात भेटू” _ म्हणत त्यानं कटवलं व दुरुस्तीला आलेल्या गाड्या आत दुकानात एका बाजूला एक लावू लागला. बारा बाय दहाच्या दुकानात पाच सहा गाड्या बसवायची कसरत रोज करायला लागायची. पण गिर्‍हाइकाच्या  गाड्या बाहेर ठेवून चालणार नाही, हे त्यालाही ठाऊक होतं. त्यात बारीक पाऊस चालू झाला होता. गाड्या लावून होईपर्यंत जफरभाईंनी सगळं सामान आत ठेऊन दिलं. हात धुतले व पोराकडे पाहिलं… त्यांना बरं वाटलं. _ ‘आपण नशीबवान… पोरगं कॉलेज शिकतंय आणि धंद्यात पण आपल्याला मदत करतंय. नाहीतर आपल्या भावांची पोरं… सगळीजण गॅरेजच्या कामात… पण दहावीच्या पुढे एकपण शिकला नाही.’ _ पाऊस आता वाढला होता. अजून वाढण्याआधी घरी पोहोचणं आवश्यक होतं. दुकानाचं शटर ओढून कुलूप लावून जफरभाई वळणार, तोच एक तरुण जोडपं गाडी ढकलत त्यांच्या दरवाज्याशी आलं. बाइकवर आधीच जाऊन बसलेला आसिफ लगेचच म्हणाला, _ “दुकान बंद हुआ भाई…!” _ जफरभाईंनी आसिफकडे फक्त एक कटाक्ष...

अजेय : योगी आदित्यनाथ के जीवन की अनकही कहानी

"अजेय" 19 सितंबर 2025 को रिलीज़ हुई फिल्म 'अजेय: एन अनटोल्ड स्टोरी ऑफ योगी' का सरल हिंदी भाषा में रिव्यू पढ़ें। जानें कैसी है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह बायोपिक, इसकी कहानी, कलाकारों का अभिनय और क्या आपको यह फिल्म देखनी चाहिए??? "अजेय: एन अनटोल्ड स्टोरी ऑफ योगी": योगी आदित्यनाथ के जीवन की अनकही कहानी ​ मुंबई: हाल ही में 19 सितंबर 2025 को रिलीज़ हुई फिल्म "अजेय: एन अनटोल्ड स्टोरी ऑफ योगी" उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित एक बायोपिक है। यह फिल्म उनके प्रारंभिक जीवन से लेकर एक प्रभावशाली राजनेता बनने तक के सफर को दर्शाती है। फिल्म का निर्देशन रवींद्र गौतम ने किया है और इसमें मुख्य भूमिका में अनंत जोशी ने योगी आदित्यनाथ का किरदार निभाया है। ​यह फिल्म शांतनु गुप्ता की किताब "द मॉन्क हू बिकेम चीफ मिनिस्टर" से प्रेरित है। फिल्म अजय सिंह बिष्ट के साधारण लड़के से योगी आदित्यनाथ बनने की कहानी को पर्दे पर लाती है, जो उत्तराखंड के एक छोटे से गाँव से निकलकर भारत के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री पद तक पहुँचते है। ...

मीराई - फिल्म (Mirai - Super Yodha)

फिल्म रिव्यू: मिराई (Mirai - Super Yodha) ​तेलुगु अभिनेता तेजा सज्जा की फिल्म 'हनु-मान' की शानदार सफलता के बाद, उनकी अगली फिल्म 'मिराई' 12 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई। यह एक फैंटेसी-एक्शन एडवेंचर फिल्म है, जो प्राचीन भारतीय इतिहास और भविष्य की तकनीक का एक अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करती है। ​ कहानी (Plot) ​फिल्म की कहानी अशोक के नौ रहस्मयी रत्नों (Nine Unknown Men) की प्राचीन कथा पर आधारित है। कहानी वेदा (तेजा सज्जा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक साधारण युवक है और अपनी रोजी-रोटी के लिए छोटे-मोटे काम करता है। उसकी जिंदगी तब बदल जाती है जब उसे पता चलता है कि वह एक 'सुपर योद्धा' है और उसका भाग्य प्राचीन ग्रंथों की रक्षा करने से जुड़ा है। ​एक दुष्ट शक्ति, जिसे 'ब्लैक स्वॉर्ड' (The Black Sword) कहा जाता है और जिसका नेतृत्व महावीर लामा (मंचू मनोज) कर रहा है, इन नौ पवित्र ग्रंथों को हासिल करना चाहता है ताकि वह दुनिया पर राज कर सके। वेदा को इन ग्रंथों को बचाने और दुनिया को अंधकार से बचाने के लिए अपनी शक्तियों को अपनाना पड़ता है। इस सफर में एक संन्यास...

दादी माँ ने बताया "पेट दर्द" का आयुर्वेदिक इलाज

पेट दर्द पेट दर्द" का आयुर्वेदिक इलाज गलत खान पान अथवा अपच के कारण होने वाले पेट दर्द के लिए आयुर्वेद में कुछ नुस्खे बताए गये हैं ! जिनका अगर प्रयोग किया जाए तो पेट दर्द कि परेशानी से बचा जा सकता है ! हालांकि इस तरह के पेट दर्द के लिए आज भी हमारे घरों में आयुर्वेदिक नुस्खे काम में लाये जाते हैं और उनसे आराम भी मिलता है ! ऐसे ही कुछ नुस्खे : - 1 . अदरक और लहसुन को बराबर कि मात्रा में पीसकर एक चम्मच कि मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से पेट दर्द में लाभ मिलता है ! 2 . एक ग्राम काला नमक और दो ग्राम अजवायन गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट दर्द में लाभ मिलता है ! 3 . अमरबेल के बीजों को पानी से पीसकर बनाए गये लेप को पेट पर लगाकर कपडे से बाँधने से गैस कि तकलीफ , डकारें आना , अपानवायु न निकलना , पेट दर्द और मरोड़ जैसे कष्ट दूर हो जाते हैं ! 4 . सौंठ , हींग और कालीमिर्च का चूर्ण बराबर कि मात्रा में मिलाकर एक चम्मच कि मात्रा में गर्म पानी के साथ लेने से पेट दर्द में तुरंत आराम मिलता है ! 5 . जटामांसी , सौंठ , आंवला और काला नमक बराबर कि मात्रा में पीस लें और एक एक चम्मच कि मात्रा में तीन ब...

दादी माँ ने बताया "डायबिटीज" का आयुर्वेदिक इलाज

डायबिटीज का आयुर्वेदिक उपचार डायबिटीज अब उम्र, देश व परिस्थिति की सीमाओं को लांघ चुका है। इसके मरीजों का तेजी से बढ़ता आंकड़ा दुनियाभर में चिंता का विषय बन चुका है। जानते हैं कुछ देशी नुस्खे मधुमेह रोगियों के लिए - नीबू: मधुमेह के मरीज को प्यास अधिक लगती है। अतः बार-बार प्यास लगने की अवस्था में नीबू निचोड़कर पीने से प्यास की अधिकता शांत होती है। खीरा: मधुमेह के मरीजों को भूख से थोड़ा कम तथा हल्का भोजन लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में बार-बार भूख महसूस होती है। इस स्थिति में खीरा खाकर भूख मिटाना चाहिए। गाजर-पालक : इन रोगियों को गाजर-पालक का रस मिलाकर पीना चाहिए। इससे आंखों की कमजोरी दूर होती है। शलजम : मधुमेह के रोगी को तरोई, लौकी, परवल, पालक, पपीता आदि का प्रयोग ज्यादा करना चाहिए। शलजम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम होने लगती है। अतः शलजम की सब्जी, पराठे, सलाद आदि चीजें स्वाद बदल-बदलकर ले सकते हैं। जामुन : मधुमेह के उपचार में जामुन एक पारंपरिक औषधि है। जामुन को मधुमेह के रोगी का ही फल कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि इसकी गुठली, छाल, रस और गूदा सभी मधुमेह में ...

विसर्जन

"विसर्जन'' ➖➖➖➖➖ पहाटेचे पाच वाजले तसें काशिनाथ रावांना जाग आली, ही त्यांची रोजचीच वेळ, आत उठून काय करायचे हा त्याच्या पुढे प्रश्न. बेडरूम मध्ये मुलगा प्रमोद आणि सून प्रणिता नातू आदर्श झोपलेले. काशिनाथराव आणि त्यांची पत्नी हॉलमध्ये, त्यांच्या पत्नीला गुढगे दुखी त्यामुळे ती वर कोचवर आणि खाली चटईवर काशिनाथराव. काशिनाथराव चुळबुळ करत पडून राहिले, त्याना माहित होत, यावेळी आपण उठलो तर सर्वांच्या तोफखण्याला तोंड द्यावे लागेल, त्यापेक्षा गुपचूप पडून राहावे. चहा चा वास आला की हळूच उठावे, कोणी चहा दिला तर गुपचूप घ्यावा. आपली परिस्थितीच तशी आली आहे किंवा घरातील इतरांनी आपली परिस्थिती घरातील झाडू सारखी केली आहे. काशिनाथ रावांनी निश्वास टाकला. पैसे न कमावणाऱ्या म्हाताऱ्या माणसाची परिस्थिती ही अशीच. काशिनाथरावांची पत्नी उठली आणि तिने चहा ठेवला हे त्यांनी ऐकले आणि ते हळूच उठले आणि बाथरूममध्ये गेले, चहा झाल्यावर ती मुलाला आणि सुनेला हाक मारायला त्याच्या बेडरूम जवळ गेली आणि दारावर थापा मारू लागली, हे त्यांनी ऐकले. त्याना वाटले ती आता आपल्याला चहा देईल, या आशेवर ते कोचवर बसून राहिले. तेप...

जीवनभर का अतूट बंधन

जीवनभर का अतूट बंधन ओमकार और आकृति का प्यार। ओमकार और आकृति एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। एक बगीचा उनकी निश्चित जगह थी जहा वो रोज मिलते थे। वे उस जगह पर एक-दूसरे से बहोत वक्त तक बात करते थे, प्रेम व्यक्त करते थे। उन्हाने जीवनभर के लिये साथ रहने के सपने देखे थे। उन्हें एक साथ पानीपुरी, इमली, आइसक्रीम, वड़ापाव, रसमलाई खाना पसंद था। वे हमेशा उन जगहों पर मिलते थे जहाँ उन्हें पसंद था और अपनी पसंद का खाना खाते थे और रोजाना अपनी निश्चित जगह, बगीचे में मिलते थे। आकृति को एक बीमारी थी जिसके कारण उसका पूरा शरीर जकड़ जाता था, और उसकी याददाश्त भी चली जाती थी। इस बीमारी का इलाज विदेश में ही हो सकता था, जिसके लिए लाखों रुपये बताए गए थे। ओमकार अमीर था। उसके पास बचपन से ही एक नौकरानी उसके घर पर काम कर रही थी। लेकिन उस समय उसके पास आकृति की बीमारी का इलाज कराने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। आकृती के बिमारी का खर्च बहोत था। आकृति के घरवाले उसकी बीमारी के कारण उससे नफरत करने लगे थे। यह ओमकार को सहन नहीं होता था। वो अपना घर-बार, संपत्ति बेच देता है और उसे भगा ले जाता है। उसकी नौकरानी आंटी भी जिद करती है...