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जीवनभर का अतूट बंधन

जीवनभर का अतूट बंधन

ओमकार और आकृति का प्यार।


ओमकार और आकृति एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे।


एक बगीचा उनकी निश्चित जगह थी जहा वो रोज मिलते थे।


वे उस जगह पर एक-दूसरे से बहोत वक्त तक बात करते थे, प्रेम व्यक्त करते थे। उन्हाने जीवनभर के लिये साथ रहने के सपने देखे थे।




उन्हें एक साथ पानीपुरी, इमली, आइसक्रीम, वड़ापाव, रसमलाई खाना पसंद था।

वे हमेशा उन जगहों पर मिलते थे जहाँ उन्हें पसंद था और अपनी पसंद का खाना खाते थे और रोजाना अपनी निश्चित जगह, बगीचे में मिलते थे।

आकृति को एक बीमारी थी जिसके कारण उसका पूरा शरीर जकड़ जाता था, और उसकी याददाश्त भी चली जाती थी। इस बीमारी का इलाज विदेश में ही हो सकता था, जिसके लिए लाखों रुपये बताए गए थे।

ओमकार अमीर था। उसके पास बचपन से ही एक नौकरानी उसके घर पर काम कर रही थी।

लेकिन उस समय उसके पास आकृति की बीमारी का इलाज कराने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। आकृती के बिमारी का खर्च बहोत था।

आकृति के घरवाले उसकी बीमारी के कारण उससे नफरत करने लगे थे।

यह ओमकार को सहन नहीं होता था।

वो अपना घर-बार, संपत्ति बेच देता है और उसे भगा ले जाता है।

उसकी नौकरानी आंटी भी जिद करती है तो वह उसे भी अपने साथ ले जाता है। और वे एक ऐसे वीरान गांव में, जहाँ उन्हें कोई नहीं जानता, जाकर साथ रहने लगते हैं।

जब तक इलाज नहीं होता, आकृति का शरीर जकड़ा रहता है। इस बीमारी से उसका जीवन बचाने के लिए उसे हफ्ते में एक बार मालिश करानी पड़ती थी।

इसी से उसका जीवन चल रहा था। वह जीने के लिए जी रही थी।

जो नौकरानी ओमकार के पास काम पर थी, वह हफ्ते में एक बार आकृति की मालिश करती थी और उसकी सेवा करती थी। वह घर के काम भी करती थी।

ओमकार और आकृति एक अनजान जगह पर रह रहे थे।ओमकार काम पर जाकर अपना और आकृति का पेट भरता था।

साथ ही साथ वह उसके इलाज के लिए पैसे जमा कर रहा था।

एक बार वह ऐसे ही काम पर जाने के लिए निकलता है।

आकृति को हँसते हुए अलविदा कहता है।

आकृति भी उसे मुस्कुराती है और इशारे से ही अलविदा कहती है।

रोज की तरह नौकरानी सारे काम कर रही होती है और...

आकृति की मालिश का समय आता है।

वह उसकी मालिश करना शुरू करती है।

और अचानक उसे ख्याल आता है कि आकृति मालकिन को एक कहानी सुनानी चाहिए।

वह उसे उसकी हकीकत कहानी के रूप में बताती है।

कहानी रंग में आती है...

और अंत में आकृति पूछती है कि वह अभी काम पर जाकर उसका पेट भर रहा है और उसके इलाज के लिए पैसे जमा कर रहा है।


क्या उन्होंने शादी की?


नौकरानी कहती है कि उन्होंने अभी शादी नहीं की है।

जब तक उसका इलाज नहीं हो जाता और उसकी यादाश वापस नहीं आ जाती, तब तक वह उससे शादी नहीं करेगा, सिर्फ उसकी सेवा करता रहेगा और उसके इलाज के लिए पैसे इकट्ठा करता रहेगा, ऐसा उसने तय किया है।


इस कहानी को 10 साल हो चुके थे।

आकृति आगे पूछती है कि फिर उसका क्या होता है।

क्या उसका इलाज होता है? क्या उसका ऑपरेशन होता है?

क्या वह ठीक हो जाती है?

नौकरानी इस समय कुछ देर के लिए चुप रहती है।

आकृति उससे पूछती है, "मुझे बताओ आगे क्या होता है।"

नौकरानी कहती है, "मैडम, यह आप ही की कहानी है।वह आप ही हैं।"

यह सुनकर आकृति को एकदम से कुछ अजीब सा लगता है। वो अचंबित रह जाती है।

वह तुरंत वहीं खड़ी हो जाती है।

पूरे जोर से अपना शरीर झटकती है और उसके सभी अंग पूरी तरह से काम करने लगते हैं।

उसे अपना अतीत याद आता है। उसकी याददाश्त वापस आ जाती है। और वह ओमकार से मिलने के लिए आतुर हो जाती है।

उसी समय ओमकार काम से वापस आता है।

वह जाकर उससे लिपट जाती है।

ओमकार, आकृति, नौकरानी, सभी खुश हो जाते हैं।

ओमकार भगवान का धन्यवाद करता है।

इसके बाद वह उसके घरवालों को इसकी खबर देता है। उसके घरवाले भी आनंदित होते हैं।


वे उनसे मिलने उनके गांव आते हैं और उनकी बडे धूमधाम से शादी करवा देते हैं।


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